कब्ज हो या दस्त, ज्यादातर लोग इसे खान-पान की गड़बड़ी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर ये समस्याएं बार-बार होती रहें, या मल में खून दिखे, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। यह Colorectal Cancer यानी बड़ी आंत के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है।
भारत में इस कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। दुनिया भर में यह महिलाओं और पुरुषों दोनों में सबसे आम कैंसर में से एक है। लेकिन अच्छी खबर यह है अगर इसे शुरुआती स्टेज में पकड़ लिया जाए, तो इलाज की सफलता दर काफी ऊंची होती है। इस लेख में हम इस कैंसर के लक्षण, कारण, जांच और इलाज को पूरी तरह से समझेंगे।
Colorectal Cancer क्या है?
Colorectal Cancer बड़ी आंत (colon) और मलाशय (rectum) में शुरू होता है। ज्यादातर मामलों में यह छोटे-छोटे पॉलिप्स (polyps) से शुरू होता है कोशिकाओं के छोटे-छोटे समूह, जो शुरुआत में कैंसरयुक्त नहीं होते। लेकिन समय के साथ, अगर इन्हें हटाया न जाए, तो ये धीरे-धीरे कैंसर में बदल सकते हैं।
इस कैंसर को स्थान के हिसाब से बांटा जाता है:
- Colon Cancer — यह बड़ी आंत में शुरू होता है
- Rectal Cancer — यह मलाशय में विकसित होता है
अगर समय रहते इसका diagnosis और treatment न हो, तो यह कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी फैल सकता है।
कोलोरेक्टल कैंसर के शुरुआती चेतावनी संकेत
शुरुआती स्टेज में कई लोगों को कोई साफ लक्षण महसूस नहीं होते। जब लक्षण दिखने लगें, तो उन्हें सामान्य कब्ज, दस्त या गैस समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शुरुआती चेतावनी संकेतों में शामिल हो सकते हैं:
मल त्याग की आदतों में लगातार बदलाव — कई हफ्तों तक कब्ज, दस्त या दोनों का बार-बार होना। अगर यह बदलाव 2 हफ्तों से ज्यादा बना रहे, तो डॉक्टर से जांच जरूरी है।
मल के आकार में बदलाव — मल पहले की तुलना में बहुत पतला, संकीर्ण या रिबन जैसा दिखाई देना। यह आंत में किसी रुकावट का संकेत हो सकता है, जो बढ़ते हुए ट्यूमर के कारण होती है।
मल में खून आना — मल में चमकीले लाल या काले रंग का खून दिखाई देना। कई बार यह खून इतना हल्का होता है कि आंखों से नहीं दिखता, और सिर्फ एक खास टेस्ट (FOBT) से ही इसका पता चलता है। इसे सिर्फ बवासीर समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।
पेट में लगातार दर्द या ऐंठन — बार-बार पेट दर्द, गैस या पेट में भारीपन महसूस होना।
मल त्याग के बाद भी पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास — बार-बार शौचालय जाने की इच्छा हो सकती है।
बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना — डाइट या एक्सरसाइज में बदलाव के बिना वजन घटना।
लगातार थकान और कमजोरी — लंबे समय तक हल्के रक्तस्राव के कारण एनीमिया हो सकता है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस होती है।
भूख में कमी
अगर इनमें से कोई लक्षण लगातार बना रहता है, बार-बार होता है या समय के साथ बढ़ रहा है, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
कोलोरेक्टल कैंसर के अन्य महत्वपूर्ण लक्षण
कुछ और संकेत भी हैं, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
मलाशय में गांठ या दबाव महसूस होना कुछ मामलों में मलाशय के अंदर गांठ बन सकती है, जिसे डॉक्टर Digital Rectal Exam (DRE) से महसूस कर सकते हैं। अगर मल त्याग के दौरान असामान्य दबाव या गांठ महसूस हो, तो यह भी जांच का कारण हो सकता है।
एक दिलचस्प बात यह है कि लक्षण इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि कैंसर बड़ी आंत के किस हिस्से में है। बाईं तरफ के कैंसर में अक्सर पेट में दर्द और मलाशय से रक्तस्राव जैसे लक्षण ज्यादा दिखते हैं, जबकि दाईं तरफ का कैंसर लंबे समय तक बिना किसी साफ लक्षण के रह सकता है, और अक्सर इसका पता एनीमिया या थकान की जांच के दौरान ही चलता है।
Colorectal Cancer के कारण और रिस्क फैक्टर्स
कोलोरेक्टल कैंसर क्यों होता है, इसका सटीक कारण पूरी तरह से पता नहीं है। लेकिन कुछ factors इसका खतरा बढ़ाते हैं:
- उम्र — 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में यह कैंसर ज्यादा होता है, हालांकि अब कम उम्र के लोगों में भी मामले बढ़ रहे हैं
- फैमिली हिस्ट्री — अगर परिवार में किसी को Colorectal Cancer या पॉलिप्स रहे हैं, तो खतरा बढ़ जाता है
- डाइट — रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड और कम फाइबर वाले आहार से खतरा बढ़ सकता है
- IBD — Crohn’s Disease या Ulcerative Colitis जैसी बीमारियों में रिस्क ज्यादा होता है
- स्मोकिंग और शराब — ये कैंसर का एक बड़ा कारण हो सकते हैं
- मोटापा और गतिहीन जीवनशैली — शारीरिक निष्क्रियता और ज्यादा वजन रिस्क बढ़ाते हैं
- डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस — इन स्थितियों वाले लोगों में भी खतरा अधिक देखा गया है
- पहले कैंसर के लिए हुई रेडिएशन थेरेपी — पेट के आसपास पहले हुई रेडिएशन थेरेपी भी risk factor मानी जाती है
Colorectal Cancer की जांच कैसे होती है?
डॉक्टर आपके लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और risk factors के आधार पर अलग-अलग टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।
Colonoscopy — इसमें एक flexible camera की मदद से colon और rectum की अंदरूनी परत की जांच की जाती है। अगर कोई suspicious polyp दिखे, तो उसे colonoscopy के दौरान ही हटाया जा सकता है (इसे Polypectomy कहते हैं) या biopsy के लिए sample लिया जा सकता है।
Stool Tests — मल में छिपे हुए रक्त या अन्य संकेतों की जांच के लिए (जैसे Fecal Occult Blood Test/FOBT)।
Blood Tests — Complete Blood Count (CBC) से anemia की जांच होती है।
Sigmoidoscopy — यह colonoscopy जैसी ही जांच है, लेकिन इसमें सिर्फ बड़ी आंत के निचले हिस्से की जांच होती है।
Biopsy — अगर colonoscopy के दौरान abnormal tissue दिखे, तो उसका छोटा सैंपल लेकर लैब में जांचा जाता है।
CT Scan या MRI — अगर कैंसर की पुष्टि हो जाए, तो यह समझने के लिए कि बीमारी कितनी फैली है, imaging tests किए जाते हैं।
कौन सा टेस्ट जरूरी है, यह व्यक्ति की उम्र, लक्षण, family history और अन्य risk factors पर निर्भर करता है।
Screening क्यों जरूरी है?
Screening का मकसद है कैंसर या ऐसे पॉलिप्स का जल्दी पता लगाना, जो आगे चलकर कैंसर में बदल सकते हैं। Colonoscopy एक बेहद महत्वपूर्ण screening test है, क्योंकि इसके दौरान पॉलिप्स की पहचान करके उन्हें कैंसर बनने से पहले ही हटाया जा सकता है।
पहले 50 साल की उम्र में screening की सलाह दी जाती थी, लेकिन अब कई गाइडलाइंस 45 साल की उम्र से ही screening शुरू करने की सलाह देती हैं, क्योंकि कम उम्र में भी मामले बढ़ रहे हैं। अगर परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास है, पहले से पॉलिप्स रहे हैं, या Crohn’s Disease अथवा Ulcerative Colitis जैसी IBD है, तो screening की जरूरत और समय सामान्य से अलग हो सकता है। अपने लिए सही screening schedule जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लें।
Colorectal Cancer के कितने स्टेज होते हैं?
कैंसर कितनी दूर तक फैल चुका है, इसके आधार पर इसे अलग-अलग stages में बांटा जाता है। डॉक्टर इसके लिए TNM (Tumor, Node, Metastasis) staging system का इस्तेमाल करते हैं।
Stage 0 — कैंसर जैसी असामान्य कोशिकाएं colon या rectum की सबसे अंदरूनी परत तक सीमित होती हैं।
Stage I — कैंसर आंत की दीवार की अंदरूनी परतों में बढ़ चुका होता है, लेकिन आमतौर पर lymph nodes तक नहीं पहुंचा होता।
Stage II — कैंसर colon या rectum की दीवार से आगे आसपास के tissues तक फैल सकता है, लेकिन lymph nodes में नहीं फैला होता।
Stage III — कैंसर आसपास के lymph nodes तक फैल चुका होता है।
Stage IV — कैंसर शरीर के दूर के अंगों, जैसे liver या lungs तक फैल चुका होता है।
इलाज और prognosis कैंसर के stage के साथ-साथ tumor की location, overall health और अन्य medical factors पर भी निर्भर करते हैं। जितनी जल्दी diagnosis होगा, इलाज उतना ही ज्यादा असरदार होगा शुरुआती स्टेज में पकड़े गए ज्यादातर मामलों में लंबे समय तक स्वस्थ जीवन की संभावना काफी अच्छी होती है।
संभावित जटिलताएं
अगर Colorectal Cancer का समय पर पता न चले और इलाज न हो, तो बीमारी बढ़ सकती है और गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकती है:
- आंत में रुकावट — बढ़ता हुआ tumor आंत के रास्ते को संकरा या बंद कर सकता है
- आंत में रक्तस्राव — tumor के कारण लगातार या ज्यादा bleeding हो सकती है
- आंत में छेद (Perforation) — कुछ गंभीर मामलों में bowel wall में छेद हो सकता है
- कैंसर का अन्य अंगों तक फैलना — advanced cases में यह liver या lungs तक फैल सकता है
- एनीमिया — लंबे समय तक bleeding से शरीर में iron की कमी और anemia हो सकता है
- कमजोरी और वजन कम होना — बीमारी बढ़ने पर भूख और overall health प्रभावित हो सकती है
Colorectal Cancer का इलाज
इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर कितनी स्टेज में है, ट्यूमर कहां है, और मरीज की उम्र व सेहत कैसी है।
सर्जरी (Colectomy) — यह सबसे आम इलाज है। कैंसर ग्रस्त आंत के हिस्से को हटाया जाता है। अगर कैंसर आंत के रास्ते को बंद कर रहा हो, तो कभी-कभी stent लगाने की भी जरूरत पड़ सकती है। कुछ मामलों में colon का हिस्सा हटाने के बाद अस्थायी या स्थायी रूप से बैग के जरिए मल निकालना पड़ता है, जिसे Colostomy कहा जाता है।
कीमोथेरेपी — कैंसर सेल्स को मारने के लिए दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है, खासतौर पर सर्जरी के बाद बचे हुए कैंसर सेल्स को खत्म करने के लिए। कुछ मामलों में सर्जरी से पहले भी कीमोथेरेपी दी जाती है, जिसे Neoadjuvant Chemotherapy कहा जाता है।
रेडिएशन थेरेपी — ट्यूमर को छोटा करने या कैंसर सेल्स को खत्म करने के लिए इस्तेमाल होती है। यह खासकर Rectal Cancer में ज्यादा असरदार मानी जाती है।
टार्गेटेड थेरेपी — Cetuximab जैसी दवाइयां कैंसर सेल्स के खास जीन या प्रोटीन को टारगेट करके उनकी growth रोकती हैं।
इम्यूनोथेरेपी — यह इलाज शरीर की immune system को मजबूत करता है, ताकि वह खुद कैंसर से लड़ सके। यह उन मामलों में इस्तेमाल होती है जहां कैंसर ज्यादा फैल चुका हो।
Palliative Care — जब कैंसर को पूरी तरह हटाना संभव न हो, तब मरीज को आराम देने, दर्द कम करने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए यह देखभाल दी जाती है।
Colorectal Cancer से बचाव कैसे करें?
- हेल्दी डाइट अपनाएं — ज्यादा फाइबर, फल और सब्जियां खाएं, प्रोसेस्ड फूड और रेड मीट से बचें
- नियमित एक्सरसाइज करें — रोजाना कम से कम 30 मिनट की physical activity जरूरी है
- स्मोकिंग और शराब से बचें — ये कैंसर का बड़ा कारण हो सकते हैं
- सही वजन बनाए रखें
- रेगुलर स्क्रीनिंग करवाएं — 45-50 साल की उम्र के बाद colonoscopy टेस्ट जरूर करवाएं, या अगर risk factors हैं तो पहले शुरू करें
डॉक्टर से कब मिलें?
अगर आपको इनमें से कोई लक्षण लगातार या बार-बार दिखाई देता है, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है:
- मल में खून आना
- कई दिनों या हफ्तों तक कब्ज या दस्त बने रहना
- मल की आदतों में अचानक बदलाव
- मल का आकार लगातार पतला या रिबन जैसा होना
- पेट में लगातार दर्द या ऐंठन
- बिना किसी कारण वजन कम होना
- लगातार थकान या कमजोरी
- मल त्याग के बाद भी पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास
इन लक्षणों का मतलब हमेशा Colorectal Cancer नहीं होता। बवासीर, संक्रमण, IBD और दूसरी digestive conditions में भी इनमें से कुछ लक्षण दिख सकते हैं। लेकिन लगातार बने रहने वाले या बिगड़ते लक्षणों की सही वजह जानने के लिए medical evaluation जरूरी है। तो आज ही HealthPil पर अपॉइंटमेंट बुक करें।
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Summary
Colorectal Cancer (कोलोरेक्टल कैंसर) बड़ी आंत (colon) और मलाशय (rectum) में होने वाला कैंसर है, जो कई मामलों में polyps से विकसित होता है। शुरुआती चरणों में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं हो सकते, लेकिन लगातार कब्ज़ या दस्त, bowel habits में बदलाव, मल में खून, पतला मल, पेट दर्द, बिना कारण वजन कम होना, भूख कम होना और लगातार थकान जैसे warning signs दिखाई दे सकते हैं।
इसके risk factors में बढ़ती उम्र, family history, unhealthy diet, IBD जैसे Crohn’s Disease और Ulcerative Colitis, smoking, alcohol, obesity, sedentary lifestyle और diabetes शामिल हैं। Diagnosis के लिए colonoscopy, stool tests, blood tests, sigmoidoscopy, biopsy और जरूरत के अनुसार CT/MRI जैसे tests किए जा सकते हैं। Screening का उद्देश्य cancer या potentially cancerous polyps को जल्दी पहचानना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या Colorectal Cancer पूरी तरह ठीक हो सकता है?
अगर Colorectal Cancer का शुरुआती स्टेज में पता चल जाए, तो इलाज के परिणाम काफी अच्छे हो सकते हैं। Treatment cancer की stage, location और मरीज की overall health पर निर्भर करता है।
2. Colorectal Cancer की जांच के लिए कौन सा टेस्ट किया जाता है?
Colonoscopy, stool tests, blood tests, sigmoidoscopy और biopsy जैसे tests का इस्तेमाल किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर CT Scan या MRI भी किया जा सकता है।
3. क्या मल में खून आना Colorectal Cancer का संकेत हो सकता है?
हां, मल में चमकीला लाल या काला खून Colorectal Cancer का संभावित warning sign हो सकता है। हालांकि, बवासीर, IBD और दूसरी digestive conditions में भी ऐसा हो सकता है, इसलिए लगातार bleeding को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
4. क्या कम उम्र के लोगों को भी Colorectal Cancer हो सकता है?
हां। हालांकि इसके अधिकांश मामले अधिक उम्र में पाए जाते हैं, लेकिन कम उम्र के लोगों में भी cases देखे जा रहे हैं। इसलिए symptoms को केवल उम्र के आधार पर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
5. क्या Colonoscopy के दौरान Polyps हटाए जा सकते हैं?
हां। अगर colonoscopy के दौरान suspicious polyps दिखाई दें, तो उन्हें उसी प्रक्रिया के दौरान हटाया जा सकता है या biopsy के लिए sample लिया जा सकता है। इससे ऐसे polyps को कैंसर में बदलने से पहले identify और remove करने में मदद मिल सकती है।
References
- Menon G, Cagir B. Colon Cancer. StatPearls Publishing. Available at:
PubMed - Roshandel G, Ghasemi-Kebria F, Malekzadeh R. Colorectal Cancer: Epidemiology, Risk Factors, and Prevention. Available at:
PubMed
Disclaimer:
यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। किसी भी मेडिकल स्थिति के लिए डॉक्टर से परामर्श ज़रूर लें।
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