क्या आपने कभी किसी को सड़क पर या किसी सार्वजनिक जगह पर अचानक दौरा पड़ते देखा है? उस पल में सही तरीके से रिएक्ट करना किसी की जान बचा सकता है। दौरा किसी को भी, कहीं भी और कभी भी हो सकता है, और सही मदद न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। इस लेख में जानिए दौरे के लक्षण, कारण, प्राथमिक उपचार और इसका मेडिकल इलाज कैसे किया जाता है।
दौरा (Seizure) क्या होता है?
हमारा मस्तिष्क अरबों न्यूरॉन्स के बीच बिजली के बेहद महीन सिग्नल भेजकर शरीर के हर काम को कंट्रोल करता है। दौरा तब पड़ता है जब मस्तिष्क में यह विद्युत गतिविधि अचानक असामान्य और अनियंत्रित हो जाती है — यानी कई न्यूरॉन्स एक साथ, बहुत तेज गति से फायर करने लगते हैं। इस अचानक “इलेक्ट्रिकल स्टॉर्म” का असर मस्तिष्क के किस हिस्से पर पड़ रहा है, उसी के आधार पर शरीर में अनियंत्रित झटके, मांसपेशियों में अकड़न, कुछ समय के लिए बेहोशी, खाली निगाहों से घूरना, भ्रम या प्रतिक्रिया न देने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
हर दौरा एक जैसा नहीं होता और सभी दौरे मिर्गी (Epilepsy) की वजह से नहीं होते। कुछ दौरे कुछ सेकंड में खत्म हो जाते हैं, जबकि कुछ कई मिनट तक चल सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि दौरा पड़ने वाले हर 10 में से करीब 1 व्यक्ति को ही आगे चलकर मिर्गी की बीमारी होती है बाकी लोगों में यह सिर्फ एक बार की घटना हो सकती है।
दौरे के सामान्य लक्षण क्या हैं?
लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि दौरा मस्तिष्क के किस हिस्से से शुरू हुआ है। सामान्य लक्षणों में शामिल हैं अचानक जमीन पर गिर जाना, शरीर का अकड़ जाना, हाथ-पैरों में अनियंत्रित झटके या ऐंठन, कुछ समय के लिए बेहोश होना या प्रतिक्रिया न देना, खाली निगाहों से घूरना, भ्रम या आसपास की स्थिति समझने में परेशानी, बार-बार होने वाली अनैच्छिक हरकतें (जैसे होंठ चटकाना), पसीना आना, और दौरे के बाद अत्यधिक नींद या थकान महसूस होना। कुछ मामलों में सिरदर्द, डर या déjà vu जैसी अजीब अनुभूति और बोलने में परेशानी भी हो सकती है। हर व्यक्ति में सभी लक्षण दिखें, यह जरूरी नहीं है।
दौरे कितने प्रकार के होते हैं?
मस्तिष्क के जिस हिस्से से दौरा शुरू होता है, उसी आधार पर इसे मुख्यतः दो बड़ी श्रेणियों में बांटा जाता है।
सामान्यीकृत दौरे (Generalized Seizures) — ये मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को एक साथ प्रभावित करते हैं। इसके अंतर्गत तीन आम प्रकार आते हैं:
- टॉनिक-क्लोनिक दौरे (Tonic-Clonic Seizures) — इसमें पहले शरीर अकड़ता है (टॉनिक फेज), फिर तेज लयबद्ध झटके शुरू होते हैं (क्लोनिक फेज)। व्यक्ति आमतौर पर इस दौरान बेहोश हो जाता है।
- अनुपस्थिति दौरे (Absence Seizures) — इसमें व्यक्ति कुछ सेकंड के लिए खाली निगाहों से घूर सकता है और आसपास की गतिविधियों पर प्रतिक्रिया नहीं दे पाता। यह बच्चों में ज्यादा आम है।
- ज्वर दौरे (Febrile Seizures) — ये मुख्य रूप से छोटे बच्चों में अचानक तेज बुखार की वजह से होते हैं। ये आमतौर पर कम समय के लिए होते हैं और अपने आप ठीक हो जाते हैं, फिर भी पहली बार होने पर डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।
फोकल दौरे (Focal Seizures) — ये मस्तिष्क के किसी एक हिस्से से शुरू होते हैं। इनमें शरीर के किसी एक हिस्से में झटके, असामान्य संवेदनाएं, घूरना या भ्रम जैसे लक्षण हो सकते हैं। व्यक्ति इस दौरान होश में भी रह सकता है (Focal Aware Seizure) या होश खो सकता है (Focal Impaired Awareness Seizure)।
दौरे पड़ने के क्या कारण हो सकते हैं?
दौरा कई अलग-अलग वजहों से हो सकता है, और कई बार इसका स्पष्ट कारण पता नहीं चल पाता। संभावित कारणों में शामिल हैं मिर्गी (Epilepsy), सिर में चोट, मस्तिष्क का संक्रमण, मस्तिष्क में ट्यूमर, बहुत कम रक्त शर्करा (Low Blood Sugar), बहुत तेज बुखार (खासकर बच्चों में), इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, शराब या नशीले पदार्थों का सेवन या उन्हें अचानक छोड़ना, नींद की कमी, चमकती या तेज रोशनी (खासकर फोटो-सेंसिटिव मिर्गी वाले लोगों में), जन्म के समय मस्तिष्क में मौजूद कोई दोष, और कुछ मामलों में परिवार में पहले से मौजूद दौरे का इतिहास। अगर किसी व्यक्ति को पहली बार दौरा पड़ा है, तो इसके पीछे मौजूद संभावित कारण की जांच के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है — भले ही यह सिर्फ एक बार की घटना क्यों न लगे।
दौरे के दौरान क्या करें (प्राथमिक उपचार)
व्यक्ति को चोट से बचाएं — उसके आसपास से नुकीली या हार्ड चीजें हटा दें, और अगर सुरक्षित तरीके से संभव हो तो उसका चश्मा उतार दें।
सिर के नीचे कुछ नरम रखें — तकिया, कपड़ा या कोई भी सॉफ्ट चीज सिर की चोट से बचाने के लिए रखें।
करवट दिलाएं — जब झटके थोड़े कम होने लगें, तो व्यक्ति को धीरे से एक तरफ करवट दिलाएं। इससे सांस लेने में आसानी होती है और अगर मुंह में लार या उल्टी हो तो वह बाहर बह जाती है, गले में फंसने का खतरा कम हो जाता है।
तंग कपड़े ढीले करें — खासकर गर्दन के आसपास के कपड़े या बेल्ट ढीली करें ताकि सांस लेने में रुकावट न आए।
समय नोट करें — दौरे की शुरुआत का समय याद रखें या फोन में नोट करें। ज्यादातर टॉनिक-क्लोनिक दौरे 1-3 मिनट में अपने आप रुक जाते हैं। अगर यह 5 मिनट से ज्यादा चले, तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें।
पानी में दौरा पड़े तो — अगर व्यक्ति स्विमिंग पूल या बाथटब में है, तो उसका सिर तुरंत पानी से ऊपर रखने की कोशिश करें। दौरा खत्म होते ही उसे पानी से बाहर निकालें और नाड़ी व सांस की जांच करें — यह स्थिति खासतौर पर खतरनाक होती है और इसमें फौरन एक्शन जरूरी है।
शांत रहें और साथ रहें — जब तक व्यक्ति पूरी तरह होश में न आ जाए, उसके पास रहें।
दौरे के दौरान क्या न करें
मुंह में कुछ न डालें — यह सोचना गलत है कि दौरे के दौरान व्यक्ति की जीभ अंदर जाकर गला घोंट सकती है। असल में मुंह में कुछ डालने से दांत टूट सकते हैं, दम घुट सकता है या जबड़े में चोट लग सकती है।
व्यक्ति को जबरदस्ती न पकड़ें — झटकों को रोकने की कोशिश में पकड़ने से मांसपेशियों या हड्डियों में चोट लग सकती है।
भीड़ इकट्ठा न होने दें — व्यक्ति के आसपास बहुत सारे लोगों का जमा होना उसे दौरे के बाद और भ्रमित कर सकता है।
दौरे के दौरान CPR न करें — सीज़र्स के दौरान सांस आमतौर पर खुद लौट आती है। अगर दौरा खत्म होने के बाद भी सांस पूरी तरह बंद रहे, तभी यह एक अलग मेडिकल इमरजेंसी है।
होश में आने तक कुछ खाने-पीने को न दें — जब तक व्यक्ति पूरी तरह सचेत होकर सुरक्षित रूप से निगल न सके, तब तक कुछ न दें।
दौरे के बाद क्या करें? (पोस्टिक्टल अवस्था)
दौरा खत्म होने के बाद व्यक्ति एक रिकवरी फेज में जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में पोस्टिक्टल अवस्था (Postictal State) कहा जाता है। इस दौरान व्यक्ति भ्रमित, बहुत थका हुआ, नींद में या भावुक महसूस कर सकता है, और उसे सिरदर्द, अस्थायी कमजोरी या धीमी बोलने जैसी दिक्कत भी हो सकती है। यह फेज कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों तक चल सकता है।
इस समय व्यक्ति को सुरक्षित स्थान पर आराम करने दें, उसे शांत रखें और भरोसा दिलाएं कि वह सुरक्षित है। अगर वह भ्रमित है, तो उससे बहुत सारे सवाल न पूछें। किसी चोट या ब्लीडिंग की जांच करें, और दौरा कितनी देर चला व उस दौरान क्या हुआ, इसकी जानकारी याद रखें ताकि डॉक्टर को बताई जा सके यह जानकारी सही कारण पहचानने में मदद करती है।
दौरे में इमरजेंसी मेडिकल हेल्प कब लें?
हर दौरे में एम्बुलेंस की जरूरत नहीं होती, लेकिन कुछ स्थितियों में तुरंत मेडिकल मदद जरूरी है:
- दौरा 5 मिनट से ज्यादा समय तक चलता है
- एक दौरा खत्म होने के तुरंत बाद दूसरा दौरा शुरू हो जाता है
- यह व्यक्ति का पहला दौरा है
- दौरे के बाद व्यक्ति सामान्य रूप से सांस नहीं ले पा रहा
- दौरे के दौरान व्यक्ति को गंभीर चोट लगी है
- दौरा पानी में पड़ा है
- व्यक्ति गर्भवती है या उसे डायबिटीज है
- साथ में बहुत तेज बुखार या हीट एग्जॉशन के लक्षण हैं
- दौरा खत्म होने के बाद भी व्यक्ति लंबे समय तक होश में नहीं आता
ये संकेत Status Epilepticus जैसी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी की तरफ इशारा कर सकते हैं, जिसमें तुरंत इलाज जरूरी होता है।
दौरे का निदान (Diagnosis) कैसे किया जाता है?
अगर किसी को पहली बार दौरा पड़ा है, तो डॉक्टर सही कारण जानने के लिए कुछ जांच करा सकते हैं। EEG (इलेक्ट्रोएंसेफेलोग्राम) मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड करता है और यह पता लगाने में मदद करता है कि असामान्य गतिविधि कहां से शुरू हो रही है। ब्लड टेस्ट से ब्लड शुगर, इलेक्ट्रोलाइट लेवल और इंफेक्शन जैसी वजहों की जांच होती है।
CT या MRI स्कैन से मस्तिष्क में ट्यूमर, चोट या स्ट्रक्चरल असामान्यता का पता चलता है। कुछ मामलों में स्पाइनल टैप भी किया जा सकता है, खासकर जब मस्तिष्क के इंफेक्शन का शक हो। डॉक्टर को दौरे के दौरान दिखे लक्षणों और आसपास मौजूद लोगों के बताए विवरण की भी जरूरत पड़ती है, क्योंकि यह सही डायग्नोसिस में काफी मदद करता है।
दौरे का उपचार कैसे किया जाता है?
अगर किसी को सिर्फ एक बार दौरा पड़ा है, तो जरूरी नहीं कि तुरंत इलाज शुरू किया जाए डॉक्टर पहले कारण की जांच करते हैं। लेकिन अगर पहले दौरे के 12 महीनों के भीतर दूसरा दौरा पड़ जाए, तो आमतौर पर इलाज शुरू किया जाता है। इलाज का तरीका दौरे के कारण, प्रकार और आवृत्ति पर निर्भर करता है।
दौरे रोधी दवाएं (Anti-Epileptic Drugs / AEDs) — यह सबसे आम और पहली पसंद का इलाज है। ये दवाएं मस्तिष्क की असामान्य विद्युत गतिविधि को कंट्रोल करके दौरे की आवृत्ति कम करने में मदद करती हैं। एक बार दवा शुरू होने के बाद डॉक्टर की सलाह के बिना इसे अचानक बंद करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे दौरा दोबारा या ज्यादा गंभीर रूप में आ सकता है।
मस्तिष्क शल्यचिकित्सा (Brain Surgery) — जिन मरीजों में दवाओं से दौरे कंट्रोल नहीं होते और दौरे मस्तिष्क के किसी एक स्पष्ट हिस्से से शुरू होते हैं, उनमें सर्जरी का विकल्प देखा जा सकता है, जिसमें उस हिस्से को सावधानी से ठीक किया जाता है।
तंत्रिका उत्तेजना (Nerve Stimulation) — जब सर्जरी संभव न हो, तो कुछ मामलों में एक छोटा डिवाइस लगाकर वेगस नर्व या मस्तिष्क को नियमित हल्के विद्युत सिग्नल देकर दौरे की आवृत्ति कम करने की कोशिश की जाती है।
इसके साथ जीवनशैली में बदलाव जैसे पर्याप्त नींद, दवा समय पर लेना, ट्रिगर्स (जैसे तेज चमकती रोशनी) से बचना, और तनाव प्रबंधन तकनीकें जैसे योग व मेडिटेशन भी दौरे की आवृत्ति कम करने में सहायक मानी जाती हैं।
दौरे में डॉक्टर से कब संपर्क करें?
अगर किसी को पहली बार दौरा पड़ा हो, बार-बार दौरे पड़ रहे हों, या दौरे के बाद लंबे समय तक होश न आए, तो देर न करें और Neurologist से संपर्क करें।
अगर दौरा 5 मिनट से ज्यादा चले, एक दौरे के तुरंत बाद दूसरा शुरू हो, सांस लेने में परेशानी हो, गंभीर चोट लगी हो या दौरा पानी में पड़ा हो, तो तुरंत emergency medical help लें।
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क्या हर दौरा मिर्गी का संकेत होता है?
नहीं। हर दौरा मिर्गी की वजह से नहीं होता। कुछ मामलों में दौरा तेज बुखार, संक्रमण, सिर में चोट, बहुत कम ब्लड शुगर, शराब या नशीले पदार्थों से जुड़े कारणों या किसी दूसरी मेडिकल स्थिति की वजह से भी हो सकता है। मिर्गी का निदान तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति को बिना किसी तात्कालिक बाहरी कारण के बार-बार दौरे पड़ते हैं। अगर किसी को पहली बार दौरा पड़ा है या दौरे बार-बार हो रहे हैं, तो सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
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Summary
दौरा (Seizure) मस्तिष्क में अचानक होने वाली असामान्य विद्युत गतिविधि के कारण होता है और इसके लक्षण दौरे के प्रकार तथा मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से पर निर्भर करते हैं। इसमें शरीर में झटके या अकड़न, बेहोशी, खाली निगाहों से घूरना, भ्रम और अनैच्छिक गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। हर दौरा मिर्गी का संकेत नहीं होता; इसके पीछे सिर की चोट, संक्रमण, कम ब्लड शुगर, तेज बुखार, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, शराब/नशीले पदार्थों से जुड़े कारण और अन्य स्थितियां हो सकती हैं।
दौरे के दौरान सबसे महत्वपूर्ण है व्यक्ति को चोट से बचाना, सिर के नीचे नरम चीज रखना, सुरक्षित होने पर करवट दिलाना, तंग कपड़े ढीले करना और दौरे की अवधि नोट करना। मुंह में कुछ डालना, व्यक्ति को जबरदस्ती पकड़ना या होश में आने से पहले खाना-पानी देना नहीं चाहिए। दौरा खत्म होने के बाद व्यक्ति भ्रमित या थका हुआ हो सकता है, इसलिए उसे सुरक्षित स्थान पर आराम देना और उसकी स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
FAQs (Frequently Asked Questions)
1. दौरे के दौरान सबसे पहले क्या करना चाहिए?
व्यक्ति को चोट से बचाने के लिए आसपास की नुकीली या खतरनाक चीजें हटा दें, सिर के नीचे नरम चीज रखें, सुरक्षित होने पर करवट दिलाएं और दौरे का समय नोट करें।
2. क्या दौरे के दौरान व्यक्ति के मुंह में कुछ डालना चाहिए?
नहीं। मुंह में कोई वस्तु डालने से दांत या जबड़े में चोट, choking और अन्य नुकसान हो सकता है। दौरे के दौरान व्यक्ति के मुंह में कुछ भी न डालें।
3. दौरा कितनी देर तक चले तो Emergency Medical Help लेनी चाहिए?
अगर दौरा 5 मिनट से अधिक समय तक चलता है, दूसरा दौरा तुरंत शुरू हो जाता है, व्यक्ति सांस नहीं ले पा रहा है या लंबे समय तक होश में नहीं आता, तो तुरंत emergency medical assistance लेनी चाहिए।
4. क्या हर दौरा मिर्गी का संकेत होता है?
नहीं। दौरा तेज बुखार, संक्रमण, सिर की चोट, कम ब्लड शुगर, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, शराब या नशीले पदार्थों से जुड़े कारणों सहित कई स्थितियों में हो सकता है। पहली बार दौरा पड़ने पर डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
5. दौरे के बाद व्यक्ति की देखभाल कैसे करनी चाहिए?
दौरे के बाद व्यक्ति भ्रमित, थका हुआ या नींद में हो सकता है। उसे सुरक्षित स्थान पर आराम करने दें, शांत रखें, चोट की जांच करें और उसके पूरी तरह होश में आने तक साथ रहें। दौरे की अवधि और उस दौरान दिखाई दिए लक्षण डॉक्टर को बताना उपयोगी होता है।
References
- Lovik K, Murr NI. Seizure. StatPearls Publishing. Available at:
PubMed - Lovik K, Murr NI. Seizure. StatPearls Publishing. Available at:
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डिस्क्लेमर:
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